भाई 'द वन' देखकर आया हूँ। दिल्ली में मुझे इसकी स्क्रीनिंग मिली थी। वहां पर भाई ट्राई करा इसको बनाने का। पर मेरे है ना फोन की बैटरी दे गई थी। जवाब पूरा फोन डेड हो गया था। 1:00 बजे घर पहुंचा हूँ। आधा घंटा फोन को चार्ज करा। खाना वाना खाया। 1:35 हो रहे हैं जब इस वीडियो को में रिकॉर्ड करने वाला हूँ। जेनुइन बताऊंगा ये फिल्म कैसा रहा है मेरा एक्सपीरियंस।
फिल्म के बारे में – कहानी और स्टार कास्ट
सिद्धार्थ मल्होत्रा एंड भाई तमन्ना भाटिया हस्बैंड वाइफ है। मुंबई में रहते हैं। गांव से उनका कनेक्शन है। गांव उनको जाना पड़ता है। क्यों जाना पड़ता है वो आपने ट्रेलर में देखा होगा। वहां जाने के बाद उनके साथ क्या होता है और पहले एक बार वो वन में जाते हैं तो वहां उनके साथ कुछ अनहोनी हो जाती है।
अब वहां जब पहुंचते हैं तो बातें चल रही होती है कि भाई अगर इस गांव का विकास करना है तो वन देवी का जो मंदिर है उसके आसपास के कुछ पेड़ हमारे को काटने होंगे। तो इससे आपको सारी कहानी का सिनॉप्सिस मिल गया।
अब इसमें अगर आपको लग रहा है कि छठ पूजा वाला सीक्वेंस के ऊपर पूरी पिक्चर बना दी है। उसकी पूरी कहानी को एक्सप्लोर किया जाएगा, बैकग्राउंड सेटअप किया जाएगा। तो नहीं, छठ पूजा का एक जस्ट सीक्वेंस लिया गया है और जब छठ पूजा वाली चीजें आती हैं तो सच बोल रहा हूँ वो बहुत अच्छा लगता है ग्रांडेड।
क्या कहानी को सही से एक्सप्लोर किया गया?
इसके अंदर जो चीजें दिखाई गई थी ट्रेलर में वो लोग फोक टेल्स वाली कहानियां, छठ पूजा उन सब चीजों को सही तरीके से एक्सप्लोर किया है या नहीं किया है, मैं इस फिल्म के लिए एक्साइटेड था ना एक रीजन।
फर्स्ट हाफ कहानी को सेटअप करने में जाता है और बहुत तेजी से निकल जाता है। आपको पता नहीं लगता क्योंकि फिल्म का रन टाइम बहुत कम है। सेकंड हाफ में फिल्म घुसती है तो कहानी को तेजी से पकड़ती है।
कहानी में उलझन
अब यहां पर डायरेक्टर बीच-बीच में कंफ्यूज होते हुए नजर आते हैं। उलझन पैदा करते हैं दर्शकों के मन में कि भाई छठ के ऊपर करनी है या फोक टेल्स वाली कहानी को लेकर चलना है। अब वो जो फोक टेल्स वाली कहानी है उसके कुछ ऐसे पहलू थे जिसको इनको पूरी तरीके से एक्सप्लोर करना चाहिए था। पूरा बैकग्राउंड बताना चाहिए था। पर ऐसे लगता है ऊपर-ऊपर से कहानी बता दी और कुछ चीजें आपके लिए ऐसे लगता है कि आप तक आई नहीं। आपको पता ही नहीं लगा। आपके मन में वो सवाल पैदा होते रहते हैं। यार ये चीज कैसे आई?
पॉजिटिव पॉइंट्स – बीजीएम, जंगल के शॉट्स, लाइटिंग
अब अगर बात करें पॉजिटिव पॉइंट्स की तो भाई बीजीएम, जंगल के शॉट्स और लाइटिंग का काम यहां पर स्पेशल मेंशन करना चाहूंगा। वो जो वन देवी के आसपास का जो माहौल क्रिएट किया जाता है वो आपको इमोशनल भी करता है, डिवोशनल भी करता है और सब चीजें बहुत बढ़िया लगती है।
निगेटिव पॉइंट – कास्टिंग
अब खराब क्या है मैं वो आपको बता दूं। खराब है इसकी कास्टिंग। एक तो है मनीष पॉल। इस बंदे को तो बाहर निकालो। इतनी क्रिंज, इतनी ओवर एक्टिंग करता है। जब-जब जिस-जिस सीन में आता है उस सीन को बर्बाद कर देता है।
अब श्वेता तिवारी और अनु सोनी वो जो क्राइम पेट्रोल वाला है।
फिल्म की स्टोरी – ऊपर-ऊपर से निकल जाती है
उनका एक पूरी तरीके से ना कहानी को नरेट नहीं किया गया। ये फिल्म डेढ़ घंटे की बीत जाती है और आपका दिमाग आपसे सवाल करता है। क्या मैं यही देखने आया था? अभी तक तो मुझे पता ही नहीं लग रहा कि फिल्म किस दिशा में जा रही है। पर ठहरना होगा रुकना होगा आखिरी के आधे घंटे के अंदर पिक्चर।
जिस तरीके से चलती है वहां पर जो चीजें दिखाई जाती है वो जो वीर तुम्हें आना होगा जब वीर एंट्री लेता है और सिद्धार्थ मल्होत्रा का जो कैरेक्टर है और वो वीर है कौन उसके लिए आप खुद देखना वहां पर एक्शन सीक्वेंस, बीजीएम, जंगल के शॉट्स, लाइटिंग का काम।
कुल मिलाकर – 3 स्टार
मैं साहब इसको बहुत बढ़ा चढ़ाकर बोलूंगा नहीं, ये फिल्म तीन स्टार वाली कैटेगरी में जाकर रुक जाती है। वो भी आखिरी के 30 से 35 मिनट फिल्म के अंदर जान फूंकी जाती है और वहीं चीजें इस फिल्म को बचा कर जाती है। नहीं तो ऐसे लग रहा था ये ऊपर-ऊपर से सारी कहानी निकल जाएगी और आपको कुछ मिलने वाला नहीं है।
अगर भाई साहब एक्टिंग की बात करूं तो सिद्धार्थ मल्होत्रा ठीक-ठाक है। कुछ खास नहीं। मेरे को तमन्ना भाटिया का काम फिर भी ठीक लगा। उसकी डायलॉग डिलीवरी अच्छी लगी।
हां, औरों के बारे में आपको बता दिया। सुनील ग्रोवर इस फिल्म के अंदर नेगेटिव कैरेक्टर के अंदर होने वाला है और उसका काम भी ओके है। मतलब कोई एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी वाली परफॉर्मेंस किसी की निकल कर नहीं आई।
आपकी राय क्या है?
आपने देखी तो बताना और आप मेरी बात से कितना रिलेट करते हैं वो भी जरूर कमेंट बॉक्स में बता कर जाना।
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मूवी और ट्रेलर रिव्यू

