साथियों कुछ फ़िल्में या सीरीज इस तरह की होती हैं जो खत्म हो जाती हैं तो लगता है की यार खत्म क्यों हुईं जैसे की मनी हीस्ट और मिर्जापुर। वहीं कुछ फ़िल्में और सीरीज ऐसी होती हैं की उन्हें देखते समय हम यही सोचते हैं की यार आखिर यह सीरीज कब खत्म होंगी।और ऐसी ही सीरीज के बारे में आज मैं आपको इस आर्टिकल में जानकारी देने वाला हूं जो की जल्दी ही अभी Amazon Prime पर रिलीज हुई है और उसका नाम है - द रिवोल्यूशनरीज। तो आइये इस वेब सीरीज के बारे में विस्तार से जानें।
सीरीज़ की बनावट – 8 एपिसोड, 7 घंटे की लंबाई
यह जो सीरीज़ है वो टोटल आठ एपिसोड की है और इसका एक-एक एपिसोड या तो 50 मिनट का है, या फिर 1 घंटे का है, या फिर उसके दरमियान है – 50 मिनट से लेकर 1 घंटे तक का। और सच बताऊँ तो यह जो ड्यूरेशन है वो इस सीरीज़ को 7 घंटे का बना देता है, जो कि बहुत ही बड़ी बात है।
सच बताऊँ, जब मैं इस सीरीज़ को देख रहा था, मैं थक गया, मैं बोर हो गया, बिंज वॉच कर रहा था। उसके बावजूद भी मैंने कई ब्रेक्स लिए बीच में खाने के लिए, इधर-उधर जाने के लिए, टहलने के लिए ताकि मेरा दिमाग जो है वह सही तरीके से काम कर सके। सच बता रहा हूँ, अगर शाहजहाँ ने इस तरह की स्क्रिप्ट या इस तरह की सीरीज़ देख ली होती, तो डेफिनेटली जो राइटर है इस सीरीज़ का, उसका वो हाथ कटवा देते। क्योंकि पता नहीं कितने ऊंचे पहाड़ का गांजा फूंक कर राइटर ने यह स्टोरी या फिर कहूँ स्क्रीनप्ले लिखा है।
एक ही चीज़ लगता है कि बार-बार स्क्रीन पर रिपीट हो रहा है। और यह जो रिपिटेशन है वो इस सीरीज़ को बहुत ही ज्यादा बोरिंग बना लेता है। तो अगर आपके अंदर क्षमता है कि आप बैठकर पूरी सीरीज़ देख सके 7 घंटे की या आप 7 घंटा अपना बर्बाद करना चाहते हैं, तो आप डेफिनेटली इस सीरीज़ को देख सकते हैं।
उसके अलावा क्या सिर्फ इस सीरीज़ में नेगेटिव पॉइंट है? तो नहीं दोस्तों, ऐसा नहीं है।
पॉजिटिव पॉइंट – शानदार एक्टिंग
सबसे पहला पॉजिटिव पॉइंट है एक्टिंग। इस सीरीज़ में बहुत ही शानदार एक्टिंग करी है भुवन बाम या फिर बाकी एक्टर्स ने। जैसे कि रोहित शराफ, गुरफते पजादा और प्रतिभा। इन चारों ने बहुत ही शानदार एक्टिंग करी है और अपने एक्टिंग के दम पर बांध के रखा मुझे 7 घंटे तक। नहीं तो मैं तो हाफ में ही देखकर उठ जाता।
और अगर बात करें बाकी डिपार्टमेंट्स की तो कॉस्ट्यूम डिज़ाइनिंग बहुत ही शानदार है। प्रोडक्शन डिज़ाइन खासकर बहुत ही ज्यादा शानदार रखा गया है इस सीरीज़ में, क्योंकि देखकर लगता है कि ब्रिटिश एरा की जो सीरीज़ है या फिर ब्रिटिश एरा को जिस तरह से बनाया गया है, सेट कंस्ट्रक्शन किया गया है और अलग-अलग चीज़ों को अलग ध्यान और डिटेल में रखकर इस सीरीज़ में दिखाया गया है। वह इस सीरीज़ को वर्थ टू वॉच बनाता है।
सीरीज़ की कहानी
और यह जो सीरीज़ है वह इर्द-गिर्द घूमती है चार रिवोल्यूशनरीज के आसपास। ठीक उसी तरह जैसे 'आरआरआर' फिल्म में आपने जो रामचरण और एनटीआर का जो कैरेक्टर था – अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम – उन दोनों रियल रिवोल्यूशनरीज को कैसे स्टोरी में घुमा फिराकर एक साथ दिखाया गया। ठीक उसी तरह कुछ कैरेक्टर्स को भी इसी तरह दिखाया गया है, जो कैरेक्टर्स रियल लाइफ में साथ में नहीं मिले थे, उन्हें भी साथ में थोड़ा सा फिक्शनल स्टोरी बनाकर दिखाया गया है। और यही इस सीरीज़ की सबसे यूनिक सेलिंग पॉइंट है।
भुवन बाम की जर्नी – छोटे कमरे से बड़े प्रोडक्शन तक
एंड टू बी ऑनेस्ट, मुझे भुवन बाम को देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा है क्योंकि जिस तरह उन्होंने एक छोटे से कमरे में अपना वीडियो बनाना शुरू किया था और आज वह बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ काम कर रहे हैं। यह डेफिनेटली बहुत ही अच्छी बात है।
और उन्होंने अपना जो एक्टिंग का रेंज है वह 'ढिंढोरा' और 'ताजा खबर' दोनों सीरीज़ में दिखा दिया है। तो जिन लोगों को हिस्ट्री बेकार और बोरिंग लगती है, वो इस सीरीज़ को देख सकते हैं। बस देखते-देखते सो मत जाना। तुम्हें हल्का सा हिस्ट्री का आइडिया लगेगा और आइडिया लगेगा कि उन क्रांतिकारियों ने हमें आजादी दिलाने के लिए क्या-क्या संघर्ष किए, क्या-क्या त्याग किया। इसका तुम्हें अच्छे से पता चल जाएगा।
फाइनल वर्डिट – 3.5 स्टार
बाकी टू बी ऑनेस्ट, सीरीज़ तो अच्छी है, बस इसका जो राइटिंग पार्ट है या फिर कहूँ स्क्रीनप्ले वाला पार्ट है, जो इतना लंबा कर दिया है इस गजेडी राइटर ने, इस वजह से मैं इस सीरीज़ को फाइव में से 3.5 स्टार्स देता हूँ।
बाकी ओवरऑल सबकी एक्टिंग अच्छी है और आपका क्या ओपिनियन है इस सीरीज़ के बारे में, कमेंट करके जरूर बताएं।
आपकी राय क्या है?
क्या आपने 'द रिवोल्यूशनरीज' देखी? आपको भुवन बाम की यह सीरीज़ कैसी लगी? क्या आपको भी 7 घंटे की लंबाई बोरिंग लगी?
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