तो भाई, फाइनली आज कार्तिक की ब्लॉकबस्टर स्पाई एक्शन थ्रिलर फिल्म यानी कि 'सरदार' का सीक्वल 'सरदार 2' को आज थिएटर्स में रिलीज़ कर दिया गया है। पर सवाल यह है कि क्या यह पार्ट वन के जैसे ही एक तबाही मूवी साबित हुई है या फिर एक ट्रैश बनकर रह गई है? आज हम इसी के बारे में चर्चा करने वाले हैं।
कहानी – बिना स्पॉइलर
तो देखो, बिना स्पॉइलर के अगर इसकी स्टोरी के बारे में तुम्हें बताऊँ, तो इस फिल्म में अपन को सरदार और उसके बेटे का एक नया मिशन देखने को मिलता है। जिसमें वो एस जे सूर के द्वारा शुरू किए जाने वाले एक बायोलॉजिकल वारफेयर को रोकने की कोशिश करते हैं। और क्या वो अपने इस मिशन में कामयाब हो भी पाते हैं या फिर नहीं, यह जानने के लिए तो यार तुमको भी मेरी तरह ऑलमोस्ट 3 घंटे लगा कर इस फ़िल्म को थिएटर में देखनी पड़ेगी।
परफॉर्मेंस – कार्तिक का दम, बाकी फीके
बात करें परफॉर्मेंस की, तो कार्तिक ने सरदार और उसके बेटे के डबल रोल में हमेशा की तरह एक नीट एंड क्लीन परफॉर्मेंस दी है। और उनकी एक्टिंग में भी कोई भी दिक्कत नहीं है। पर फिल्म में उन्हें कुछ भी ऐसा सॉलिड करने के लिए मिला ही नहीं है, जिसमें वह पर्दे पर कमाल दिखा सके। उनका डबल रोल होने के बावजूद भी एक भी ऐसा सीन फिल्म में नहीं है, जो कि मेरे मन में थोड़ा भी घर कर सके।
साथ ही फिल्म में एस जे सूर, मालविका मोहन और योगी बाबू जैसे कई जाने-माने एक्टर्स भी फिल्म में नज़र आते हैं। पर एट द सेम टाइम यार, उनमें से भी कोई भी बंदा अपने पर कुछ भी पॉजिटिव इम्पैक्ट नहीं छोड़ पाता है। और फिल्म में विलेन के रूप में एस जे सूर का रोल बड़ा तो है, पर उनका कैरेक्टर और एक्टिंग दोनों ही बहुत ही लाउड, आउटडेटेड और बहुत ही इरिटेटिंग सी लगती है।
एनालिसिस – कहानी ठीक, पर एक्जीक्यूशन फेल
अब आते हैं गाइस, इसके एनालिसिस पर। तो फिल्म की कहानी एक सीरियस और इंटरेस्टिंग नोट पर शुरू होती है, जहाँ एजेंट वालस की तलाश मिशन डाकू तक ले जाती है। और अच्छी बात यह है कि फिल्म बिना भटके सीधे प्लॉट पर ही फोकस करने लगती है। लेकिन प्रॉब्लम यह है यार कि इसका एक्जीक्यूशन बहुत ही ज्यादा सिली और मचकाना टाइप है।
इस वजह से इसका पूरा जापान वाला एपिसोड, खासकर के मिलिट्री प्लेन का सीक्वेंस, जहाँ कार्तिक और मालविका दोनों हवा में स्टंट करते हैं और प्लेन से जंप करते हैं – वो बिल्कुल ही ज्यादा मजाकिया सा फील होता है। हालांकि पर्दे पर सब कुछ बहुत ही ज्यादा सीरियस दिखाया गया है, पर वहाँ की एक्शन कोरियोग्राफी ही यार कुछ ऐसी है ना कि अपन को देखकर हँसी आने लगती है।
इसके अलावा कार्तिक का फ्लैशबैक और मालविका का मशीन को डीएक्टिवेट करने वाला सीन भी यार अपन को थोड़ा भी हिट नहीं कर पाता है। यहाँ डायरेक्टर ने प्लॉट पर फोकस करने की कोशिश तो पूरी की है, पर एक्जीक्यूशन में फर्स्ट हाफ पूरी तरह से फेल भी रहता है। सिवाय इसके इंटरवल ब्लॉक के और जिसके बाद गाइस आता है, इसका सेकंड हाफ। और सच कहूँ तो अपन को इसके सेकंड हाफ में भी कोई खास राहत देखने के लिए नहीं मिलती है।
क्योंकि इसकी लंबी लेंथ अपन के दिमाग को वहाँ पर और भी ज्यादा थका देती है। इसके अलावा इसके क्लाइमेक्स और प्री-क्लाइमेक्स को भी जबरदस्ती ही बहुत ही ज्यादा लंबा खींचा गया है। योगी बाबू की कॉमेडी भी किसी काम की नहीं है। और साथ ही वहाँ पर एस जे सूर और कार्तिक दोनों के कैरेक्टर के बीच चलने वाली कभी न खत्म होने वाली एरियल यानी हवा में चलने वाला फाइट सीक्वेंस अपन के दिमाग की और भी ज्यादा दही कर डालता है।
इसके अलावा फिल्म में लॉजिक के भी लगे हुए हैं। और इसका बीजीएम भी ऐसा है ना, जैसे कि अपन से बदला लेने के लिए थिएटर में बजाया जा रहा है। और जिसका नतीजा गाइज यह होता है कि फिल्म खत्म होते-होते एट द एंड अपन ये सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर अपन इस फिल्म को देख ही क्यों रहे हैं।
कुल मिलाकर
कुल मिलाकर गाइस, 'सरदार 2' मेरी नज़र में एक ऐसी बिलो एवरेज फिल्म साबित हुई है ना, जिसने सरदार वन के जैसे तबाही मचाना तो छोड़ दो, उल्टा मेरे सर में ही दर्द पैदा कर दिया है। तो मेरा सजेशन तो यार ये रहेगा कि अगर तुम इसे देखने के बारे में सोच ही रहे हो, तो थिएटर की जगह ओटीटी पर ही देख लेना। तो उससे शायद तुम्हें थोड़ा कम सदमा लगेगा।
आपकी राय क्या है?
क्या आपने 'सरदार 2' देखी? आपको फिल्म कैसी लगी? क्या यह पहले पार्ट जैसी तबाही मचा पाई या ट्रैश निकली?
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मूवी और ट्रेलर रिव्यू