तो दोस्तों, 'आवारापन 2' को फाइनली रिलीज कर दिया गया है और मैंने ये मूवी देख भी ली है। आज इस आर्टिकल में मैं बात करने वाला हूँ कि यह मूवी कैसी लगी मुझे और आपको यह मूवी देखनी चाहिए या नहीं।
क्योंकि उनके वजह से और उनकी सूरत की वजह से इमरान हाशमी के मुँह से वो डायलॉग सुनने में काफी अलग सी फीलिंग आती है। एक चेहरा है, एक आवाज़ है जो बार-बार मेरे कान में गूँजती है। वो डायलॉग जिस तरह से रिकॉर्ड किया गया है, बहुत अलग तरीके से किया गया है।
तो चलिए शुरू करते हैं — आवारापन 2 का पूरा रिव्यू।
कहानी – क्या है फिल्म में?
कहानी वहीं से शुरू होती है जहाँ से शिवम पंडित (इमरान हाशमी) ने मौत को मात दी थी। अब वह मौत के साथ अपने नाते को समझ चुके हैं और उस डर से जूझना सीख चुके हैं। इनका मौत के साथ जो नाता है, वह बहुत ही अलग, पोएटिक और खतरनाक भी है।
इस बार शिवम का सामना जोरावर से होता है। एक पाकिस्तानी एक्ट्रेस का बैकस्टोरी दिखाया गया है, जहाँ बच्चियों को बेचा जा रहा होता है और मलिक साहब उनमें से एक को निकालकर अपनी कीप बना कर रखते हैं।
इस बार दिशा पटानी के साथ 40 बच्चे हैं, जो अंडरवर्ल्ड का हिस्सा बनने वाले हैं। इस बार विलेन कोई मेल नहीं, फीमेल है और उसके अंडर में एक बंदा है जो बहुत ही खतरनाक है।
कहानी में आगे यह दिखाया गया है कि शिवम उन बच्चों को रेस्क्यू कर पाएगा या नहीं और क्या वह अपने दर्द का इस्तेमाल करके मौत को एक बार फिर से चकमा देगा या इस बार सीधा जन्नत जाकर अपनी आलिया से मिलेगा?
परफॉर्मेंस – किसने किया कमाल?
इमरान हाशमी (शिवम पंडित)
इमरान हाशमी की परफॉर्मेंस आपको टिकाकर रखती है। उनका स्क्रॉफ, उनका कुर्ता पहनने का तरीका और उनके हाथ का वो पिजन बना हुआ अंदाज — यह सारी चीज़ें वायरल होने वाली हैं। पिछली बार जब यह फिल्म आई थी, तब वायरलिटी उस तरह से नहीं थी, लेकिन अब सोशल मीडिया पर यह सब ट्रेंड करेगा।
शबाना आज़मी
शबाना आज़मी की परफॉर्मेंस टॉप नॉच है। उनके सीन्स थोड़े कम हैं, लेकिन जब भी आती हैं, अपनी छाप छोड़ जाती हैं।
दिशा पटानी
दिशा पटानी आई कैंडी की तरह हैं। उनसे जितना होता है, वो करती हैं — बस इतना समझ लो। वो फिल्म में मज़ा तो देती हैं, लेकिन कुछ एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी नहीं हैं।
अन्य कलाकार
- जोरावर का कैरेक्टर — शानदार
- नए-नए लोगों को जोड़ा गया है, जिनके कैरेक्टर काफी इंटरेस्टिंग लगते हैं
- अर्जुन रामपाल के बाप वाला कैरेक्टर — गाली देता रहता है और अपनी छाप छोड़ता है
ओवरऑल हर किसी की परफॉर्मेंस अच्छी है।
डायरेक्शन – नितिन कक्कड़ का काम
नितिन कक्कड़ ने इमरान हाशमी के ओरा को मेंटेन करने की कोशिश की है। शिवम का पहला शॉट वही है — बालकनी में खड़ा, पीछे से हल्का कैमरा, एक उदास सा और बहुत ही शकल उतरा हुआ इंसान। बिल्कुल वैसा ही जैसा पहली फिल्म में था।
लेकिन जो मोहित सूरी का मैजिक था, वो धीरे-धीरे लोगों पर चढ़ने लगा था। मुझे मोहित सूरी की हर फिल्म अच्छी लगती है — हाँ, वो ढापा हुआ होता है, कहीं ना कहीं कोरियन मूवी से उठाकर चेप देते हैं, लेकिन उनका प्रेजेंटेशन जबरदस्त होता है। दिल और दिमाग से जाता नहीं।
नितिन कक्कड़ उस चीज़ में 100% सफल नहीं होते। वह प्यार को दिखाने, लव स्टोरी को संभालने में 70-80% सक्षम होते हैं, लेकिन 100% नहीं।
अगर इमरान हाशमी नहीं होते, तो इस फिल्म का जन्म नहीं होता। शिवम का कैरेक्टर अगर मरकर वापस नहीं आता, तो 'आवारापन 2' नहीं आता।
म्यूजिक – सबसे बड़ी ताकत!
फिल्म का गाना 'तेरा मेरा रिश्ता' — भाई, एकदम सही लगा गाना और सही जगह पर डाला है। यह गाना दोबारा से आपका मोस्ट फेवरेट गाना होने वाला है।
इसके अलावा 'वजनू' और एक-दो गाने हैं, लेकिन मुझे उस तरह से कनेक्ट नहीं किया। लेकिन हाँ, फिल्म के साथ जा रही होती है।
क्या यह फिल्म 'सयारा' जैसी हो सकती है?
अगर जजी (संभवतः कोई सेंसर बोर्ड या राजनीतिक व्यक्ति) के हाथ लग गई, तो मे बी 'सयारा' जैसा हो जाए। लेकिन मुझे नहीं लगता कि जजी इसको उस तरह से कनेक्ट कर पाएंगे, क्योंकि यह बहुत ही मैच्योर स्टोरी है।
इसमें कोई भी वैसा नहीं दिखाया गया कि — "ले अब ट्रेड बन रहा है, लड़की को बांधकर जा रहे हैं या फिर लड़की चिल्ला रही है।" इट इज़ नॉट लाइक दैट।
ओवरऑल रिव्यू – देखें या नहीं?
| पैरामीटर | रेटिंग | |
|---|---|---|
| कहानी | ठीक-ठाक, पुरानी यादें ताज़ा करती है | |
| इमरान हाशमी की परफॉर्मेंस | शानदार, पूरी फिल्म अपने कंधे पर उठाई | |
| डायरेक्शन | कमजोर, मोहित सूरी की कमी खलती है | |
| म्यूजिक | 'तेरा मेरा रिश्ता' — सुपरहिट! | |
| ओवरऑल | एक बार ज़रूर देख सकते हो |
मेरा अपना टेक
मुझे यह फिल्म अच्छी लगी है, भले ही डायरेक्शन थोड़ी कमजोर रही हो। जिस जॉनर में यह चल रही थी, उस जॉनर का 100% नहीं दे पाती, लेकिन इमरान हाशमी का कनेक्शन लोगों के साथ अलग है।
इमरान हाशमी के फैंस के लिए — यह फिल्म बस आपके लिए बनी है। पिछले 13 सालों से जो फैंस इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें यह मूवी निराश नहीं करेगी। हाँ, अगर बहुत ज्यादा उम्मीद लगा के बैठे हो, तो कहीं ना कहीं फिल्म फेल होता हुआ नजर आएगी।
लेकिन — इमरान हाशमी की पर्सनालिटी, उनका स्क्रीन प्रेजेंस, उनका डायलॉग डिलीवरी — यह सब अलग ही लेवल का है।
ओनरली — मेरा सच्चा रिफ्लेक्शन
मैं उन लोगों को सीधा इग्नोर करता हूँ फिल्मों में जो बस आई कैंडी हैं। उनसे जितना होता है, वो करती हैं — दैट्स इट! आप बस इतना समझ लो क्या करती है वो।
अगर आपने 'आवारापन 2' देख लिया, तो मुझे कमेंट सेक्शन में बताओ कि आपको कैसी लगी।
आपकी राय क्या है?
- क्या आपने 'आवारापन 2' देखी?
- इमरान हाशमी की वापसी कैसी लगी?
- फिल्म आपको कैसी लगी?
- क्या यह आपकी उम्मीदों पर खरी उतरी?
कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!
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मूवी और ट्रेलर रिव्यू

