साथियों आर्यभट्ट का जीरो मूवी देखकर आया हूं।और भाई एक बात क्लियर करूँगा की आर्यभट्ट का जीरो मूवी उन फिल्मों की तरह है जो शोर मचाकर नहीं बल्कि, धीरे - धीरे दिल को टच करके अपनी जगह बनाती है।अगर आप मोटिवेशनल, स्लाइस ऑफ लाइफ और इमोशनल ड्रामा वाली फ़िल्में पसंद करते हैं, तो एक बात मैं आपसे कहूंगा की इस फिल्म को आप अवश्य देखें।
अब यह फिल्म ऐसी नहीं है कि बहुत ही गजब की है या कुछ आउट ऑफ द बॉक्स है। लेकिन जिस तरीके से इन लोगों ने इमोशंस को बड़े पर्दे पर दिखाया है – वह वाकई काबिले तारीफ है।आज के इस आर्टिकल में मैं आपको इस मूवी का पूरा रिव्यू देने वाला हूं, तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
बात करें फिल्म की कहानी की तो इसकी स्टोरी ब्रह्मागुप्त श्रीवास्तव उर्फ बग्गू के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका रोल हिमांशु कोहली ने निभाया है।
बग्गू एक मिडिल क्लास फैमिली का 25 साल का लड़का है, जो जिंदगी में डायरेक्शन खो चुका है। उसे पता ही नहीं कि करना क्या है। हर तरफ से उसे सिर्फ असफलता ही मिल रही हैं और साथ ही धीरे-धीरे उसका कॉन्फिडेंस ज़ीरो हो जाता है।
ज़ीरो का पावरफुल मेटाफोर
फिल्म इसी ज़ीरो को एक पावरफुल मेटाफोर बना देती है।
जैसे मैथ्स में ज़ीरो अकेला छोटा लगता है, लेकिन किसी नंबर के साथ लग जाए तो उसकी वैल्यू बढ़ा देता है। वैसे ही इंसान की जिंदगी में आत्म विश्वास सब कुछ बदल सकता है।
यही संदेश फिल्म में खूबसूरती से दिखाया गया है।
कलाकार और उनकी परफॉर्मेंस
हिमांशु कोहली (बग्गू) – मुख्य भूमिका
हिमांशु कोहली ने बग्गू के किरदार में बेहतरीन काम किया है। एक उलझे हुए, कॉन्फिडेंस खो चुके युवा का दर्द उन्होंने बखूबी पेश किया है। उनका अभिनय आपको फिल्म से कनेक्ट करवाता है।
सोनाली सहायत (रीकू) – पॉजिटिविटी लाने वाली साथी
सोनाली सहायत रीकू के रोल में नजर आती हैं, जो बग्गू की जिंदगी में पॉजिटिविटी लेकर आती है। उनका स्क्रीन टाइम ज्यादा नहीं है, लेकिन इमोशनल सपोर्ट वह खूब देती हैं।
रविकिशन (छट्टू भैया) – लाजवाब कॉमेडी और इमोशन
रविकिशन इस फिल्म में छट्टू भैया का रोल निभा रहे हैं। उनकी स्क्रीन प्रजेंस लाजवाब है। इन दिनों हर दूसरी फिल्म में रविकिशन देखने को मिल रहे हैं, लेकिन हर बार वह अपने किरदार को अलग और यादगार बनाते हैं।
- कुछ कॉमेडी करते हैं
- कुछ इमोशनल सीन्स भी हैं
- हर जगह अपनी छाप छोड़ जाते हैं
फैमिली मेंबर्स – नीरज सूद और अलका अमीन
फैमिली मेंबर्स के रोल में नीरज सूद और अलका अमीन नजर आते हैं। दोनों का काम ठीक-ठाक है और उन्होंने अपनी भूमिकाओं को अच्छे से निभाया है।
फिल्म की खासियत – रियलिस्टिक और रिलेटेबल स्टोरी
इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी सुपरहीरो की कहानी नहीं दिखाती। यह आम इंसान की कहानी है, जो जिंदगी में स्ट्रगल करता है।
- कभी जॉब नहीं मिलती
- कभी लोग ताने मारते हैं
- कभी खुद पर ही डाउट होने लगता है
यह सब चीजें हमें फिल्म में देखने को मिलती हैं। और सच कहूं तो – हम सबने जिंदगी में कभी ना कभी ऐसा महसूस किया है:
- एग्जाम में फेल होना
- इंटरव्यू क्लियर ना होना
- अपने सपने के लिए बार-बार रिजेक्ट होना
यह फिल्म इन्हीं इमोशंस को कैप्चर करती है। इसी वजह से बग्गू का यह सफर और भी ज्यादा रिलेटेबल लगता है।
फर्स्ट हाफ vs सेकंड हाफ
फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो चलता है। फिल्म धीरे-धीरे आपका अटेंशन ग्रैब करती है और आपसे कनेक्ट होती है।
लेकिन सेकंड हाफ में फिल्म पूरी तरह इमोशंस पर खेलती है और आपका कनेक्शन मजबूत होता है। सेकंड हाफ में फिल्म अपनी पूरी ताकत के साथ आती है।
कुल मिलाकर – कैसी है फिल्म?
यह फिल्म आउट ऑफ द बॉक्स तो नहीं है, लेकिन दिल को छूने वाली जरूर है।
| पैरामीटर | कैसा है? |
|---|---|
| कहानी | सिंपल, रिलेटेबल और इमोशनल |
| एक्टिंग | हिमांशु कोहली और रविकिशन ने कमाल किया |
| डायरेक्शन | इमोशंस को बड़े पर्दे पर बखूबी उतारा |
| संदेश | सेल्फ बिलीफ से जीरो भी हीरो बन सकता है |
| कुल मिलाकर | एक बार जरूर देखने लायक |
किसे देखनी चाहिए यह फिल्म?
- अगर आप मोटिवेशनल स्टोरी पसंद करते हैं
- अगर आपको स्लाइस ऑफ लाइफ फिल्में पसंद हैं
- अगर आप इमोशनल ड्रामा देखना पसंद करते हैं
- अगर आप हिमांशु कोहली या रविकिशन के फैन हैं
तो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी।
आपकी राय क्या है?
क्या आपने 'आर्यभट्ट का जीरो' देखी है?
- फिल्म कैसी लगी आपको?
- बग्गू का किरदार कहां तक रिलेटेबल लगा?
- रविकिशन का छट्टू भैया का रोल कैसा लगा?
- ज़ीरो वाला मेटाफोर आपको कैसा लगा?
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मूवी और ट्रेलर रिव्यू

