हेलो साथियों कैसे हो आप लोग? साथियों एक फ़िल्म आज रिलीज हुई है दायरा, जिसे बनाया है मेघना गुलजार ने।मेघना गुलजार को तो आप जानते ही होंगे जिन्होंने बहुत सारी फ़िल्में बनाई हैं। खासकर उनकी तलवार और राजी मूवी मुझे बहुत ही ज्यादा पसंद आई थी।तो अगर उनकी कुछ फ़िल्में आपको पसंद आई थीं तो समझ लीजिये की यह फ़िल्म भीआपको बहुत पसंद आएगी।क्योंकि 'दायरा' फिल्म का जो थीम है वो मर्डर और रेप केस के ऊपर ही है,लेकिन किस तरीके से स्टोरी आगे बढ़ती है, वो देखने वाली चीज़ है।
कहानी – तीन स्टोरी एक साथ
इस फ़िल्म में आपको तीन स्टोरी को एक साथ दिखाया गया है, तो इसलिए कन्फ्यूज मत हो जाइयगा।
अब एक स्टोरी वह चलेगी जहां पर मर्डर मिस्ट्री पूरी तरीके से सॉल्व हो जाती है। लेकिन पुलिस का ही आपस में कुछ मैटर चल रहा होता है, क्योंकि पुलिस की भी बहुत सारी कार्रवाइयां होती हैं। और एक स्टोरी चल रही होती है जब मर्डर केस को सॉल्व कर रहे होते हैं, वो स्टोरी वहां पर चलेगी। और एक स्टोरी आपकी चलेगी मर्डर होने से पहले की – मतलब वो घटना किस तरीके से आगे बढ़ी।
तीन स्टोरियों को बीच-बीच में मिक्स करके दिखाया जाएगा, जिसकी वजह से आपके अंदर थोड़ी सी कन्फ्यूजन पैदा हो सकती है। लेकिन अगर आप ध्यान से आराम से ठहराव के साथ इस फिल्म को देखते हैं, तो यह दिक्कत बिल्कुल भी नहीं आने वाली है।
हालांकि अगर आप इस फिल्म को अच्छे से देख लेते हैं, तो आपको स्टोरी तो समझ में आ ही जाएगी। लेकिन उसके बावजूद आप यह भी फील करेंगे कि मैंने एक अच्छा सिनेमा देखा है, मैंने एक अच्छी फिल्म देखी है। कहीं ना कहीं इस फिल्म का डायरेक्शन बहुत जबरदस्त है।
करीना कपूर और पृथ्वीराज का कमाल
और अगर बात करें
दोनों लीड कास्ट की, तो भाई
करीना कपूर पहली बार कॉप के रोल में हैं। लेकिन कहीं से भी यह नहीं लगा कि करीना कपूर की यह पहली फिल्म है।
एक ए कॉप का रोल है –
1% भी आपको नहीं लगेगा कि यह उनकी पहली फिल्म है।
दूसरी तरफ पृथ्वीराज भाई, वो बंदा पहले से ही ऐसी फिल्मों में काम कर चुका है। वो परफेक्ट है इन चीज़ों के लिए। और सबसे बड़ी बात यह है कि वह जब-जब स्क्रीन पर रहेंगे, तो आपको मज़ा आएगा फिल्म के अंदर। ऐसा उनका रोल है, ऐसा उनका हो रहा है फिल्म के अंदर।
और जिस तरीके से इस फिल्म की कहानी है, कहीं ना कहीं दो से तीन सवाल आपके दिमाग में उठेंगे कि यह नहीं होता तो यह नहीं होता, और अगर यह नहीं होता तो यह नहीं होता। हालांकि भाई आप बोलोगे यहां पे खाली स्थान भरो, मैं नहीं मर सकता क्योंकि पूरी फिल्म का स्पॉइल हो जाएगा।
क्या है फिल्म का थीम?
अब बात करें इस फिल्म की कहानी और इसके क्लाइमेक्स की तो, भाई मैं नहीं बताऊंगा क्योंकि पूरी फिल्म का स्पॉइल हो जाएगा। सिर्फ थोड़ा सा हिंट दे रहा हूँ। लेकिन इसके अलावा एक चीज़ और है जो आपके दिमाग के अंदर दौड़ेगी कि भाई कौन सही है? पृथ्वीराज या करीना, कौन अपनी जगह पर सही है?
हालांकि हमें इस चीज़ पे बहस करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जिस तरीके से इसका क्लाइमेक्स छोड़ा है, तो हमें भी नहीं पता चलता कि करीना लास्ट में क्या करने वाली है। लेकिन जो पृथ्वीराज ने किया, वो सही है। यह तो परफेक्ट है, इसमें तो कोई भी हम थोड़ा सा भी संदेह नहीं कर सकते।
कुल मिलाकर भाई, मुझे तो फिल्म बहुत अच्छी लगी। फिल्म में मेरी तरफ से तो मुझे कोई कमी नज़र नहीं आई। हाँ, लेकिन मूवी स्लो है और इस तरह की फिल्में ज्यादातर स्लो ही होती हैं। और सबसे बड़ी बात यह चीज़ आपको पूरी फिल्म के अंदर फील भी नहीं होगी, क्योंकि अगर आपने 'तलवार' जैसी फिल्में देखी हैं और अगर आपको पसंद आई थी, तो आपको ना तो इसके बीजीएम से प्रॉब्लम होगी और ना ही आपको इस फिल्म के स्लो होने से प्रॉब्लम होगी। क्योंकि मर्डर मिस्ट्री वाली फिल्में ऐसे ही होती हैं।
लेकिन यहां पर जो मैसेज देना चाहते हैं, वो मैसेज वैसे तो स्टार्टिंग से ही दिखाई देगा, लेकिन लास्ट तक आते-आते आपके खुद के दिमाग में एक सवाल छोड़ जाएगा कि सही कौन है? तो यही इस फिल्म का थीम है।
फाइनल वर्डिट – 3.5 स्टार
कुल मिलाकर भाई, फिल्म अच्छी है, जबरदस्त है। सभी की एक्टिंग जबरदस्त है, स्टोरी जबरदस्त है, डायरेक्शन जबरदस्त है और क्लाइमेक्स भी मुझे तो पर्सनली अच्छा ही लगा।
तो भाई, अगर रेटिंग की बात करें तो मेरी तरफ से इस फिल्म को जाते हैं फाइव में से 3.5 स्टार तो मिलते हैं।