ट्रेलर में क्या खास और क्या कमी?
पॉजिटिव प्वाइंट्स:
| पॉइंट | डिटेल |
|---|---|
| कंटेंट | ट्रेलर में बहुत कुछ हो रहा है – ड्रामा, एक्शन, इमोशन |
| कैरेक्टर्स | रैंडम नहीं, हर कैरेक्टर इंटरेस्टिंग लग रहा है |
| परफॉर्मेंस | बहुत प्रॉमिसिंग, खासकर यश और R. आडवाणी की |
| विजुअल्स | काफी बढ़िया, प्रोडक्शन वैल्यू सॉलिड |
| मेकिंग | बर्फ में फाइट सीन और विजुअल्स कमाल के |
| टाइटल जस्टिफिकेशन | फिल्म अपने 'टॉक्सिक' टाइटल को सही मायने में जस्टिफाई करती नजर आ रही है |
निगेटिव प्वाइंट्स:
| पॉइंट | डिटेल |
|---|---|
| एडिटिंग | बहुत फास्ट और बहुत स्लो के बीच ट्रांजिशन अच्छा नहीं |
| पेसिंग | एक मीडियम पेस से अचानक फास्ट और फिर स्लो – कन्फ्यूज करता है |
| कट्स | घड़ी की टिक-टिक वाले कट्स ट्रेलर के ओवरऑल मूड से मैच नहीं करते |
| लंबाई | 4 मिनट 40 सेकंड भी कम पड़ गया – इतना कुछ दिखाने के लिए 6 मिनट चाहिए था |
| ओवरऑल फील | थोड़ा मेसी सा फील होता है |
कैरेक्टर्स और परफॉर्मेंस
ट्रेलर की सबसे अच्छी बात यह है कि बड़े बजट की फिल्मों में बहुत कम ऐसा देखने को मिलता है – हर कैरेक्टर इंटरेस्टिंग है:
| कैरेक्टर/एक्टर | रिव्यू |
|---|---|
| R. आडवाणी | पहले सीन में डायलॉग – "वो मुझसे नफरत करते हैं" – थोड़ा फनी लगा, लेकिन आगे जाकर डेडली स्माइल कमाल की |
| यश (राया) | पूरी लाइफ का सफर – शुरू से लेकर अंत तक कैरेक्टर में बदलाव साफ दिखता है |
| यश (टिकट) | एक डिफरेंट कैरेक्टर – पहचानना मुश्किल, बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन और डायलॉग डिलीवरी में फर्क साफ |
| तारा सुतारिया | इंटरेस्टिंग लग रही हैं |
| नयनतारा | शांत कैरेक्टर – शायद बड़ा सरप्राइज़ दे सकती हैं |
| रुकमणी वसंत | शांत कैरेक्टर – शायद बड़ा सरप्राइज़ दे सकती हैं |
एडिटिंग और डायरेक्शन – कोशिश तो बहुत की गई है
जिन्होंने एडिट किया है, उन्होंने ट्रेलर के साथ बहुत कुछ करने की कोशिश की है। कट्स के साथ काफी एक्सपेरिमेंट किया गया है। लेकिन कहीं ना कहीं वो ओवरऑल मूड के साथ जाता नहीं है।
पिता और बेटे की पैनिमेशंस ने कहीं ना कहीं 'कैजीएफ' की याद दिला दी।
जंगल फाइट सीन और यश की एंट्री
जंगल फाइट सीन में जब यश की एंट्री होती है, वहां पर उनके डायलॉग्स – खासकर हिंदी वर्जन में – मुझे साइको और फनी कैरेक्टर के बीच का मिक्स लगा।
लेकिन हां, आगे जाकर कैरेक्टर काफी सीरियस तरीके से भी नजर आता है। ओवरऑल, यश का कैरेक्टर बहुत बढ़िया है।
विजुअल्स और प्रोडक्शन वैल्यू – टॉप क्लास
ट्रेलर के अंदर फिल्म की मेकिंग काफी सॉलिड है।
- विजुअल्स – काफी बढ़िया नजर आ रहे हैं
- प्रोडक्शन वैल्यू – बहुत ही बढ़िया लग रही है
- बर्फ में फाइट सीन – स्टैंडर्ड के हिसाब से काफी अच्छा है
- कहीं भी कोई विजुअल सस्ता नहीं लगता
लग रहा है कि यश ने जो समय दिया है और जो पैसा लगाया गया है, वह ट्रेलर देखकर फील होता है।
क्या ट्रेलर में बहुत कुछ रिवील कर दिया गया?
ऊपर-ऊपर से देखा जाए तो ऐसा लगता है कि ट्रेलर के अंदर काफी कुछ रिवील कर दिया गया है। लेकिन स्टिल मैं कहूंगा कि फिल्म के अंदर काफी कुछ ट्विस्ट एंड टर्न्स या फिर सरप्राइजेस हमें कैरेक्टर लेवल पर देखने को मिल सकते हैं।
नयनतारा और रुकमणी वसंत के कैरेक्टर शांत लग रहे हैं, लेकिन पर्सनली मुझे ऐसा लगता है कि यही दो कैरेक्टर शायद फिल्म के अंदर सबसे बड़ा सरप्राइज़ डिलीवर कर सकते हैं।
4 मिनट 40 सेकंड के अंदर जो सब चीजें दिखाने की कोशिश की गई है, उससे मैं कह सकता हूं कि लेंथ के हिसाब से भी या फिर जो डिसीजंस लिए गए हैं, उस कारण से ट्रेलर थोड़ा मेसी सा फील होता है।
लेकिन जिस तरीके से:
- परफॉर्मेंस नजर आ रही है
- कैरेक्टर्स नजर आ रहे हैं
- सेटअप नजर आ रहा है
वहां पर मैं कह सकता हूं कि चीजें बहुत ही प्रॉमिसिंग हैं।
क्या ट्रेलर 'टॉक्सिक' के टाइटल को जस्टिफाई करता है?
हां! कहीं ना कहीं फिल्म अपने 'टॉक्सिक' टाइटल को, अपनी डार्क थीम को जस्टिफाई करती हुई नजर आ रही है।
ओवरऑल – एक इंटरेस्टिंग और प्रॉमिसिंग ट्रेलर निकलकर आया है।
- कट और बेटर हो सकता था
- थोड़ा-बहुत चीजों को मैनेज करके और कुछ अच्छे डिसीजंस लिए जा सकते थे
- 4 मिनट 40 सेकंड के अंदर और बेहतर किया जा सकता था
आपको ट्रेलर कैसा लगा? कमेंट में बताएं!
पर्सनली, मैं इस फिल्म को लेकर एक्साइटेड हूं। देखना चाहूंगा कि:
- किस तरीके से फिल्म के अंदर इन कैरेक्टर्स को हैंडल किया गया है
- किस तरीके से प्रेजेंट किया गया है
- एक फिल्म के अंदर किस तरीके से पूरी कहानी को दिखाया गया है
आपको पर्सनली ट्रेलर कैसा लगा? कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा।
ट्रेलर वीडियो :-
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मूवी और ट्रेलर रिव्यू

